राजधर्मः—प्रमादवर्जनं, दण्डनीतिः, दुर्बलरक्षणम्
Royal Dharma: Vigilance, Just Punishment, Protection of the Vulnerable
यदा शारणिकानू् राजा पुत्रवत् परिरक्षति । भिनत्ति च न मर्यादां स राज्ञो धर्म उच्यते,जब राजा व्यापारियोंकी पुत्रके समान रक्षा करता है और धर्मकी मर्यादाको भंग नहीं करता, तब वह भी राजाका धर्म कहलाता है
yadā śāraṇikān rājā putravat parirakṣati | bhinatti ca na maryādāṃ sa rājño dharma ucyate ||
ଯେତେବେଳେ ରାଜା ଶରଣାଗତମାନଙ୍କୁ ନିଜ ପୁତ୍ରମାନଙ୍କ ପରି ରକ୍ଷା କରନ୍ତି ଏବଂ ଧର୍ମ-ବ୍ୟବସ୍ଥାର ମର୍ଯ୍ୟାଦା ଭଙ୍ଗ କରନ୍ତି ନାହିଁ—ସେହି ଆଚରଣକୁ ରାଜଧର୍ମ ବୋଲି କୁହାଯାଏ।
उतथ्य उवाच