Mantri-Parīkṣā — Testing Ministers, Securing Counsel, and Ethical Criteria for Advisers (अध्याय ८४)
कुलीन: कुलसम्पन्नस्तितिक्षुर्दक्ष आत्मवान् । शूर: कृतज्ञः सत्यश्न श्रेयस: पार्थ लक्षणम्,कुन्तीनन्दन! उत्तम कुलमें जन्म होना, सदा श्रेष्ठ कुलके सम्पर्कमें रहना, सहनशीलता, कार्यदक्षता, मनस्विता, शूरता, कृतज्ञता और सत्यभाषण--ये ही श्रेष्ठ पुरुषके लक्षण हैं
କୁନ୍ତୀନନ୍ଦନ! ଉତ୍ତମ କୁଳରେ ଜନ୍ମ, ଶ୍ରେଷ୍ଠ କୁଳର ସଙ୍ଗ, ସହନଶୀଳତା, କାର୍ଯ୍ୟଦକ୍ଷତା, ଆତ୍ମବଳ, ଶୌର୍ୟ, କୃତଜ୍ଞତା ଓ ସତ୍ୟଭାଷଣ—ଏହିସବୁ ଶ୍ରେଷ୍ଠ ପୁରୁଷର ଲକ୍ଷଣ।
भीष्म उवाच