आपद्धर्मे वैश्यवृत्तिः, विक्रय-निषेधाः, तथा ब्रह्म-क्षत्र-सम्बन्धः
Emergency Livelihood, Prohibited Trade, and Brahman–Kshatra Regulation
तमेव पूजयेयुस्ते प्रीत्या स्वमिव बान्धवम् । अभीरभीक्ष्णं कौरव्य कर्ता सन््मानमहति,डाकुओंसे पीड़ित होकर कष्ट पाते हुए अनाथ मनुष्यगण जिसकी शरणमें जाकर सुखपूर्वक रह सकें, उसीको अपने बन्धु-वान्धवके समान मानकर बड़ी प्रसन्नताके साथ उसका आदर-सत्कार करना उनके लिये उचित है; क्योंकि कुरुनन्दन! जो निर्भय होकर बारंबार दूसरोंका संकट निवारण कर सके, वही राजोचित सम्मान पानेके योग्य है
tam eva pūjayeyus te prītyā svam iva bāndhavam | abhīrabhīkṣṇaṃ kauravya kartā san mānam arhati ||
ସେମାନେ ତାହାଙ୍କୁ ହିଁ ପ୍ରୀତିରେ ପୂଜିବେ—ନିଜ ବନ୍ଧୁକୁ ପୂଜିବା ପରି। ହେ କୌରବ୍ୟ! ଯେ ନିର୍ଭୟ ହୋଇ ପୁନଃପୁନଃ ଅନ୍ୟମାନଙ୍କ ଦୁଃଖ ନିବାରଣ କରେ, ସେଇ କର୍ତ୍ତା ରାଜୋଚିତ ସମ୍ମାନର ଯୋଗ୍ୟ।
भीष्म उवाच