Rāma–Jāmadagnya-janma-kāraṇa and Kṣatra-kṣaya
Paraśurāma’s origins and the depletion/restoration of kṣatriya lineages
ततः कालेन पृथिवी पीड्यमाना दुरात्मभि:,कालक्रमसे दुरात्मा मनुष्य अपने अत्याचारोंसे पृथ्वीको पीड़ित करने लगे। इस उलट- फेरसे पृथ्वी शीघ्र ही रसातलमें प्रवेश करने लगी; क्योंकि उस समय धर्मरक्षक क्षत्रियोंद्वारा विधिपूर्वक पृथिवीकी रक्षा नहीं की जा रही थी
ତାପରେ କାଳକ୍ରମେ ଦୁରାତ୍ମା ମନୁଷ୍ୟମାନଙ୍କର ଅତ୍ୟାଚାରରେ ପୃଥିବୀ ପୀଡିତ ହେବାକୁ ଲାଗିଲା। ଅଧର୍ମ ବଢ଼ିବାରୁ ସେ ଶୀଘ୍ର ଧ୍ୱଂସପଥକୁ ଝୁକିଲା; କାରଣ ଧର୍ମରକ୍ଷକ କ୍ଷତ୍ରିୟମାନେ ବିଧିମତ ଭାବେ ତାହାର ରକ୍ଷା କରୁନଥିଲେ।
वासुदेव उवाच