/ ऑपन-माज बछ। डे त्रिषष्ट्याधिकत्रिशततमो< ध्याय: उज्छ एवं शिलवृत्तिसे सिद्ध हुए पुरुषकी दिव्य गति सूर्य उवाच नैष देवोडनिलसखो नासुरो न च पन्नग: । उज्छवृत्तिव्रते सिद्धो मुनिरेष दिवं गत:,सूर्यदेवने कहा--से न तो वायुके सखा अग्निदेव थे, न कोई असुर थे और न नाग ही थे। ये उज्छवृत्तिसे जीवननिर्वाहके व्रतका पालन करनेसे सिद्धिको प्राप्त हुए एक मुनि थे, जो दिव्यधाममें आ पहुँचे हैं
Sūrya uvāca—naiṣa devo ’nilasakho nāsuro na ca pannagaḥ | ucchiṣṭavṛttivrate siddho munir eṣa divaṃ gataḥ ||
ସୂର୍ଯ୍ୟ କହିଲେ—“ଏ ନ ଅନିଲସଖ ଦେବ (ଅଗ୍ନି) ଅଟେ, ନ ଅସୁର, ନ ଚ ପନ୍ନଗ (ନାଗ)। ଉଚ୍ଛବୃତ୍ତି-ବ୍ରତରେ ସିଦ୍ଧିଲାଭ କରିଥିବା ଏ ମୁନି ଦିବ୍ୟଲୋକକୁ ପ୍ରାପ୍ତ ହୋଇଛନ୍ତି।”
सूर्य उवाच