कालनिर्देशः शोकनिवारणं च
Instruction on Kāla and the Removal of Grief
युधिष्ठिरने पूछा--पितामह! किन-किन कर्मोंको करनेसे मनुष्य प्रायश्चित्तका अधिकारी होता है और उनके लिये कौन-सा प्रायश्चित्त करके वह पापसे मुक्त होता है? इस विषयमें यह मुझे बतानेकी कृपा करें ।। व्यास उवाच अकुर्वन् विहित॑ कर्म प्रतिषिद्धानि चाचरन् | प्रायश्षित्तीयते होवं नरो मिथ्यानुवर्तयन्,व्यासजी बोले--राजन्! जो मनुष्य शास्त्रविहित कर्मोका आचरण न करके निषिद्ध कर्म कर बैठता है, वह उस विपरीत आचरणके कारण प्रायश्चित्तका भागी होता है
vyāsa uvāca | akurvan vihitaṃ karma pratiṣiddhāni cācaran | prāyaścittīyate hovaṃ naro mithyānuvartayan ||
ବ୍ୟାସ କହିଲେ—ହେ ରାଜନ୍! ଯେ ମନୁଷ୍ୟ ଶାସ୍ତ୍ରବିହିତ କର୍ମ କରେନାହିଁ ଏବଂ ନିଷିଦ୍ଧ କର୍ମ କରିବସେ, ସେ ଏହି ବିପରୀତ ଆଚରଣରେ ପ୍ରାୟଶ୍ଚିତ୍ତର ଅଧିକାରୀ ହୁଏ।
व्यास उवाच