Nārada’s Darśana of Viśvarūpa Nārāyaṇa and the Caturmūrti Doctrine (नारदस्य नारायणदर्शनं चतुर्मूर्तिविचारश्च)
व्यवसायेन शुद्धेन मद्विधैश्छिन्नसंशय: । विमुच्य हृदयग्रन्थीनासादयति तां गतिम्,मेरे-जैसे लोगों द्वारा जिसका संशय नष्ट हो गया है, वह साधक विशुद्ध निश्चयके द्वारा हृदयकी गाँठें खोलकर उस परमगतिको प्राप्त कर लेता है
vyavasāyena śuddhena madvidhaiś chinna-saṁśayaḥ | vimucya hṛdaya-granthīn āsādayati tāṁ gatim ||
ଜନକ କହିଲେ— ମୋ ପରି ଲୋକମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଯାହାର ସନ୍ଦେହ ଛିନ୍ନ ହୋଇଛି, ସେ ସାଧକ ଶୁଦ୍ଧ ଓ ଅଚଳ ନିଶ୍ଚୟରେ ହୃଦୟର ଗ୍ରନ୍ଥିଗୁଡ଼ିକୁ ଖୋଲି ସେହି ପରମ ଗତିକୁ ପ୍ରାପ୍ତ କରେ।
जनक उवाच