Śuka’s Guṇa-Transcendence and Vyāsa’s Consolation (शुकगति-वर्णनम्)
आधिपत्ये तथा तुल्ये निग्रहानुग्रहात्मके । राजभिभिक्षुकास्तुल्या मुच्यन्ते केन हेतुना,किसीका निग्रह और किसीपर अनुग्रह करना ही आधिपत्य (प्रभुत्व) कहलाता है। यह जैसे राजामें है, वैसे संन्यासीमें भी है। इस दृष्टिसे जब संन्यासी भी राजाओंके ही समान हैं, तब केवल वे ही मुक्त होते हैं--ऐसा माननेका क्या कारण है?
ādhipatye tathā tulye nigrahānugrahātmake | rājabhibhikṣukās tulyā mucyante kena hetunā ||
ଜନକ କହିଲେ— ନିଗ୍ରହ ଓ ଅନୁଗ୍ରହ କରିବା ହିଁ ଆଧିପତ୍ୟର ସ୍ୱରୂପ। ଏହା ଯେପରି ରାଜାରେ ଅଛି, ସେପରି ଭିକ୍ଷୁ/ସନ୍ନ୍ୟାସୀରେ ମଧ୍ୟ ଅଛି। ଏହି ଦୃଷ୍ଟିରୁ ଯେତେବେଳେ ରାଜା ଓ ଭିକ୍ଷୁ ସମାନ, ତେବେ କେବଳ ଭିକ୍ଷୁମାନେ ମୁକ୍ତ ହୁଅନ୍ତି—ଏହା କେଉଁ ହେତୁରେ?
जनक उवाच