अव्यक्तकालमान-निर्णयः
Measures of Time from the Unmanifest; Creation, Elements, and the Primacy of Mind
भीष्म उवाच (इत्युक्त्वा परमो देवो भगवान् नित्य अव्यय: । साथ्यर्देवगणै: सार्थ दिवमेवारुरोह सः ।। भीष्मजी कहते हैं--युधिष्ठि!! ऐसा कहकर नित्य अविनाशी परमदेव भगवान् ब्रह्मा साध्य देवताओंके साथ ही ऊपर स्वर्गलोककी ओर चल दिये। एतद् यशस्यमायुष्य॑ पुण्यं स्वर्गाय च ध्रुवम् । दर्शितं देवदेवेन परमेणाव्ययेन च ।।) सर्वश्रेष्ठ अविनाशी देवाधिदेव ब्रह्माजीके द्वारा प्रकाशमें लाया हुआ यह पुण्यमय तत्त्वहज्ञान यश और आयुकी वृद्धि करनेवाला है तथा यह स्वर्गलोककी प्राप्तिका निश्चित साधन है। संवाद इत्ययं श्रेष्ठ: साध्यानां परिकीर्तित: । क्षेत्र वै कर्मणां योनि: सद्भाव: सत्यमुच्यते,युधिष्ठिर! इस प्रकार साध्योंके साथ जो हंसका संवाद हुआ था, उसका मैंने तुमसे वर्णन किया। यह शरीर ही कर्मोौंकी योनि है और सद्भावको ही सत्य कहते हैं
bhīṣma uvāca | ity uktvā paramo devo bhagavān nityo 'vyayaḥ | sādhya-devagaṇaiḥ sārthaṃ divam evārurōha saḥ || etad yaśasyam āyuṣyaṃ puṇyaṃ svargāya ca dhruvam | darśitaṃ devadevena parameṇāvyayena ca || saṃvāda ity ayaṃ śreṣṭhaḥ sādhyanāṃ parikīrtitaḥ | kṣetraṃ vai karmaṇāṃ yoniḥ sadbhāvaḥ satyam ucyate ||
ଭୀଷ୍ମ କହିଲେ—ଏହିପରି କହି ପରମ ଦେବ, ନିତ୍ୟ ଓ ଅବ୍ୟୟ ଭଗବାନ ବ୍ରହ୍ମା ସାଧ୍ୟ ଦେବଗଣଙ୍କ ସହିତ ସ୍ୱର୍ଗଲୋକକୁ ଆରୋହଣ କଲେ। ଦେବାଧିଦେବ ସେହି ପରମ ଅବ୍ୟୟ ପ୍ରଭୁ ଯେ ପବିତ୍ର ଉପଦେଶ ପ୍ରକାଶ କରିଛନ୍ତି, ତାହା ଯଶ ଓ ଆୟୁ ବଢ଼ାଏ ଏବଂ ସ୍ୱର୍ଗପ୍ରାପ୍ତିର ନିଶ୍ଚିତ ସାଧନ। ଯୁଧିଷ୍ଠିର! ସାଧ୍ୟମାନଙ୍କ ସହ ହଂସଙ୍କ ଯେ ଶ୍ରେଷ୍ଠ ସମ୍ବାଦ ହୋଇଥିଲା, ମୁଁ ତୁମକୁ ସେହି କଥା କହିଦେଲି। ଏହି ଶରୀର କର୍ମମାନଙ୍କର କ୍ଷେତ୍ର ଓ ଯୋନି; ଏବଂ ‘ସତ୍ୟ’ ବୋଲି ସଦ୍ଭାବ—ଅନ୍ତର୍ଗତ ଯଥାର୍ଥ ଶୁଦ୍ଧ ଭାବ—କୁ କୁହାଯାଏ।
भीष्म उवाच