अव्यक्तकालमान-निर्णयः
Measures of Time from the Unmanifest; Creation, Elements, and the Primacy of Mind
साध्या ऊचु. क: स्विदेको रमते ब्राह्मणानां कः: स्विदेको बहुभिरजोषमास्ते । कः स्विदेको बलवान् दुर्बलो5पि कः स्विदेषां कलहं नान्ववैति,साध्योंने पूछा--हंस! ब्राह्मणोंमें कौन एकमात्र सुखका अनुभव करता है? वह कौन ऐसा एक मनुष्य है, जो बहुतोंके साथ रहकर भी चुप रहता है? वह कौन एक मनुष्य है, जो दुर्बल होनेपर भी बलवान् है तथा इनमें कौन ऐसा है, जो किसीके साथ कलह नहीं करता?
sādhyā ūcuḥ—kaḥ svideko ramate brāhmaṇānāṃ? kaḥ svideko bahubhir ajoṣam āste? kaḥ svideko balavān durbalo 'pi? kaḥ svideṣāṃ kalahaṃ nānvavaiti?
ସାଧ୍ୟମାନେ ପଚାରିଲେ—ହେ ହଂସ! ବ୍ରାହ୍ମଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ କିଏ ଏକମାତ୍ର ସତ୍ୟରୂପେ ସନ୍ତୋଷରେ ରମେ? କିଏ ଅନେକଙ୍କ ସହ ରହିଲେ ମଧ୍ୟ ଅପ୍ରେରିତ ହୋଇ ମୌନ ରହେ? କିଏ ଦୁର୍ବଳ ହୋଇ ମଧ୍ୟ ବଳବାନ? ଏବଂ ଏମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ କିଏ କାହା ସହ କଲହ କରେ ନାହିଁ?
हंस उवाच