अव्यक्तकालमान-निर्णयः
Measures of Time from the Unmanifest; Creation, Elements, and the Primacy of Mind
सदा देवा: साधुभि: संवदन्ते न मानुषं विषयं यान्ति द्रष्टम् नेन्दु: सम: स्थादसमो हि वायु- रुच्चावचं विषयं यः स वेद,देवतालोग सदा सत्पुरुषोंका संग--उन्हींके साथ वार्तालाप करते हैं; इसीलिये वे मनुष्योंके क्षणभंगुर भोगोंकी ओर देखने भी नहीं जाते। जो विभिन्न विषयोंके नश्वर स्वभावको ठीक-ठीक जानता है, उसकी समानता न चन्द्रमा कर सकते हैं न वायु
sadā devāḥ sādhubhiḥ saṃvadante na mānuṣaṃ viṣayaṃ yānti draṣṭum | nenduḥ samaḥ sthād asamo hi vāyur uccāvacaṃ viṣayaṃ yaḥ sa veda ||
ଦେବତାମାନେ ସଦା ସତ୍ପୁରୁଷମାନଙ୍କ ସଙ୍ଗ କରନ୍ତି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ସହିତ ହିଁ ସମ୍ବାଦ କରନ୍ତି; ତେଣୁ ମନୁଷ୍ୟମାନଙ୍କ କ୍ଷଣଭଙ୍ଗୁର ଭୋଗକୁ ଦେଖିବାକୁ ମଧ୍ୟ ସେମାନେ ଯାଆନ୍ତି ନାହିଁ। ଯେ ଜଣେ ବିଷୟମାନଙ୍କର ଉଚ୍ଚ-ନୀଚ ଓ ନଶ୍ୱର ସ୍ୱଭାବକୁ ଯଥାର୍ଥ ଜାଣେ, ତାହାଙ୍କ ସମତୁଳ୍ୟ ନ ଚନ୍ଦ୍ର, ନ ବାୟୁ।
हंस उवाच