Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
अवादयतू तत्र वीणां मध्ये विश्वावसु: स्वयम् । सर्वभूतान्यमन्यन्त मम वादयतीत्ययम्,“उनके उस सुवर्णमय यूपमें जो सोनेका चषाल (घेरा) बना था, उसके ऊपर छ: हजार देवगन्धर्व नृत्य किया करते थे। वहाँ साक्षात् विश्वावसु बीचमें बैठकर सात स्वरोंके अनुसार वीणा बजाया करते थे। उस समय सब प्राणी यही समझते थे कि ये मेरे ही आगे बाजा बजा रहे हैं
avādayatū tatra vīṇāṃ madhye viśvāvasuḥ svayam | sarvabhūtāny amanyanta mama vādayatīty ayam ||
ବାୟୁ କହିଲେ— ସେଠାରେ ମଧ୍ୟଭାଗରେ ସ୍ୱୟଂ ବିଶ୍ୱାବସୁ ବୀଣା ବାଜାଉଥିଲେ; ଏବଂ ସମସ୍ତ ପ୍ରାଣୀ ମନେ ମନେ ଭାବୁଥିଲେ— ‘ଏହି ମୋ ପାଇଁ ହିଁ ବାଜାଉଛନ୍ତି।’
वायुदेव उवाच