अध्यात्म-तत्त्व-निर्णयः
Adhyātma Taxonomy: Elements, Faculties, and Guṇas
यावानात्मनि वेदात्मा तावानात्मा परात्मनि । य एवं सततं वेद सो<मृतत्त्वाय कल्पते,अपने शरीरके भीतर जैसा ज्ञानस्वरूप आत्मा है वैसा ही दूसरोंके शरीरमें भी है, जिस पुरुषको निरन्तर ऐसा ज्ञान बना रहता है, वह अमृतत्त्वको प्राप्त होनेमें समर्थ है
yāvān ātmani vedātmā tāvān ātmā parātmani | ya evaṃ satataṃ veda so 'mṛtatvāya kalpate ||
ନିଜ ଦେହରେ ଯେପରି ଜ୍ଞାନସ୍ୱରୂପ ଆତ୍ମା ଅଛି, ସେହିପରି ଆତ୍ମା ଅନ୍ୟମାନଙ୍କ ଦେହରେ ମଧ୍ୟ ଅଛି। ଯାହାର ମନରେ ଏହି ବୋଧ ସଦା ରହେ, ସେ ଅମୃତତ୍ୱ ପ୍ରାପ୍ତିକୁ ଯୋଗ୍ୟ ହୁଏ।
व्यास उवाच