योग–सांख्यसमन्वयः, रथोपमा, व्यक्त–अव्यक्तविवेकः
Yoga–Sāṃkhya Synthesis, Chariot Allegory, and the Vyakta–Avyakta Distinction
पूर्णमण्डलमालोक्य तावुत्थायोपतस्थतु: । दोनों एकाग्रचित्त होकर प्राचीन वृत्तान्तोंकी चर्चा कर ही रहे थे कि किरणजालसे मण्डित भगवान् भास्करका उदय हुआ। सूर्यदेवका सम्पूर्ण मण्डल देख उन दोनोंने खड़े होकर उनका उपस्थान किया
pūrṇamaṇḍalam ālokya tāv utthāyopatasthatuḥ |
ସେ ଦୁଇଜଣ ଏକାଗ୍ରଚିତ୍ତ ହୋଇ ପ୍ରାଚୀନ ବୃତ୍ତାନ୍ତ ଆଲୋଚନା କରୁଥିବାବେଳେ, କିରଣଜାଳରେ ଶୋଭିତ ଭଗବାନ୍ ଭାସ୍କରଙ୍କ ଉଦୟ ହେଲା। ସୂର୍ୟଦେବଙ୍କ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ମଣ୍ଡଳ ଦେଖି ସେମାନେ ଦୁଇଜଣ ତୁରନ୍ତ ଉଠି ଦାଁଡ଼ାଇ ଶ୍ରଦ୍ଧାରେ ତାଙ୍କୁ ଉପସ୍ଥାନ କଲେ।
भीष्म उवाच