दमप्रशंसा — Praise of Self-Restraint
Dama
क्रोधात् काममवाप्याथ लो भमोहौ च मानवा: । मानदर्पावहड़्कारमहड्कारात् तत:ः क्रिया:,क्रोधसे काम उत्पन्न होता है और फिर कामसे मनुष्य लोभ, मोह, मान, दर्प एवं अहंकारको प्राप्त होते हैं। तत्पश्चात् अहंकारसे प्रेरित होकर ही उनकी सारी क्रियाएँ होने लगती हैं
Bhīṣma uvāca: krodhāt kāmam avāpya atha lobha-mohau ca mānavāḥ | māna-darpāv ahaṅkāram ahaṅkārāt tataḥ kriyāḥ ||
କ୍ରୋଧରୁ କାମ ଜନ୍ମେ; କାମରୁ ମନୁଷ୍ୟ ଲୋଭ ଓ ମୋହରେ ପତିତ ହୁଏ, ଏବଂ ମାନ, ଦର୍ପ, ଅହଂକାରକୁ ପ୍ରାପ୍ତ କରେ। ତାପରେ ଅହଂକାରର ପ୍ରେରଣାରେ ତାଙ୍କର ସମସ୍ତ କ୍ରିୟା ଚାଲିଥାଏ।
भीष्म उवाच