प्रजापतयः देवगणाश्च दिशि-दिशि स्थिताः ऋषयः
Prajāpatis, Deva-Groups, and the Ṛṣis Assigned to the Directions
मही महीजा: पवनो<न््तरिक्ष॑ जलौकसश्लैव जलं दिवं च । दिवौकसश्चापि यतः प्रसूता- स्तदुच्यतां मे भगवन् पुराणम्,भगवन्! पृथ्वी, पार्थिव पदार्थ, वायु, आकाश, जलजन्तु, जल, द्युलोक और देवता जिससे उत्पन्न होते हैं, वह पुरातन वस्तु क्या है? यह मुझे बताइये
bhīṣma uvāca |
mahī mahījāḥ pavano 'ntarikṣaṃ jalaukasaś caiva jalaṃ divaṃ ca |
divaukasaś cāpi yataḥ prasūtās tad ucyatāṃ me bhagavan purāṇam ||
ଭୀଷ୍ମ କହିଲେ—ଭଗବନ୍! ଯେ ପୁରାତନ ତତ୍ତ୍ୱରୁ ପୃଥିବୀ ଓ ପାର୍ଥିବ ପଦାର୍ଥ, ପବନ, ଅନ୍ତରିକ୍ଷ, ଜଳଚର ପ୍ରାଣୀ, ଜଳ, ଦ୍ୟୁଲୋକ ଏବଂ ଦ୍ୟୁଲୋକବାସୀ ଦେବତାମାନେ ଉତ୍ପନ୍ନ ହୁଅନ୍ତି—ସେ ଆଦିମ ମୂଳ କ’ଣ? ମୋତେ କହନ୍ତୁ।
भीष्म उवाच