Adhyāya 199: Karma–Jñāna Causality and the Nirguṇa Brahman
Manu’s Instruction
तस्यापरोक्षं विज्ञानं षडड्रेषु बभूव ह । वेदेषु चैव निष्णातो हिमवत्पादसंश्रय:,कहते हैं कि हिमालय पर्वतके निकटवर्ती पहाड़ियोंपर एक महायशस्वी धर्मात्मा ब्राह्मण रहता था, जो वेदके छहों अंगोंका ज्ञाता, परम बुद्धिमान् तथा जपमें तत्पर रहनेवाला था। वह पिप्पलादका पुत्र था और कौशिक वंशमें उसका जन्म हुआ था। वेदके छहों अंगोंका विज्ञान उसे प्रत्यक्ष हो गया था, अतः वह वेदोंका पारंगत विद्धान् था
bhīṣma uvāca | tasyāparokṣaṃ vijñānaṃ ṣaḍ-aṅgeṣu babhūva ha | vedeṣu caiva niṣṇāto himavat-pāda-saṃśrayaḥ |
ଭୀଷ୍ମ କହିଲେ— ତାଙ୍କର ବେଦର ଷଡ଼ଙ୍ଗବିଷୟକ ଜ୍ଞାନ ଅପରୋକ୍ଷ ଥିଲା। ସେ ବେଦରେ ମଧ୍ୟ ନିଷ୍ଣାତ ଥିଲେ ଏବଂ ହିମାଳୟର ପାଦଦେଶକୁ ଆଶ୍ରୟ କରି ବସୁଥିଲେ।
भीष्म उवाच