Varṇa-lakṣaṇa and Ātma-saṃyama (Marks of Social Conduct and Self-Restraint) | वर्णलक्षणम् एवं आत्मसंयमः
दुर्भिक्षादेव दुर्भिक्षं क्लेशात् क्लेशं भयाद् भयम् । मृतेभ्य: प्रमृतं यान्ति दरिद्रा: पापकारिण:,पापाचारी दरिद्र मनुष्य दुर्भिक्षसे दुर्भिक्ष, क्लेशसे क्लेश और भयसे भय पाते हुए मरे हुओंसे भी अधिक मृतकतुल्य हो जाते हैं
durbhikṣād eva durbhikṣaṃ kleśāt kleśaṃ bhayād bhayam | mṛtebhyaḥ pramṛtaṃ yānti daridrāḥ pāpakāriṇaḥ ||
ଦୁର୍ଭିକ୍ଷରୁ ସେମାନେ ଆଉ ଦୁର୍ଭିକ୍ଷକୁ, କ୍ଲେଶରୁ ଆଉ କ୍ଲେଶକୁ, ଭୟରୁ ଆଉ ଭୟକୁ ପଡ଼ନ୍ତି। ପାପକର୍ମୀ ଦରିଦ୍ରମାନେ ମୃତମାନଙ୍କଠାରୁ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ମୃତତୁଲ୍ୟ ହୋଇଯାନ୍ତି।
भीष्म उवाच