Dama-pradhāna-dharma (Self-restraint as the Root of Dharma) — Śānti-parva 154
इह पुंसां सहस््राणि स्त्रीसहस्नाणि चैव ह | समानीतानि कालेन हित्वा वै यान्ति बान्धवा:,उनके रोनेके शब्दसे आकृष्ट होकर एक गीध वहाँ आया और इस प्रकार कहने लगा --'मनुष्यो! इस जगत्में अपने इस इकलौते पुत्रको यहाँ छोड़कर लौट जाओ, देर मत करो। यहाँ हजारों स्त्री-पुरुष कालके द्वारा लाये जा चुके हैं और उन सबको उनके भाई- बन्धु छोड़कर चले जाते हैं
iha puṁsāṁ sahasrāṇi strī-sahasrāṇi caiva ha | samānītāni kālena hitvā vai yānti bāndhavāḥ ||
ଭୀଷ୍ମ କହିଲେ— “ଏହି ଲୋକରେ ପୁରୁଷଙ୍କ ହଜାର ହଜାର ଓ ନାରୀଙ୍କ ମଧ୍ୟ ହଜାର ହଜାର—ନିଶ୍ଚୟ—କାଳ ଦ୍ୱାରା ଏକତ୍ର (ମୃତ୍ୟୁ ପାଖକୁ) ଆଣାଯାନ୍ତି; ତାପରେ ବନ୍ଧୁମାନେ ସେମାନଙ୍କୁ ଛାଡ଼ି ଚାଲିଯାନ୍ତି। ଏହାହିଁ ମର୍ତ୍ୟଧର୍ମ।”
भीष्म उवाच