आशा-कृशता उपाख्यानम्
The Episode on the Emaciation Caused by Hope
ततो निम्नं स्थलं चैव स मृगो<द्रवदाशुग: । मुहूर्तमिव राजेन्द्र समेन स पथागमत्,राजेन्द्र! शीघ्रतापूर्वक भागनेवाला वह मृग वहाँसे नीची भूमिकी ओर दौड़ा। फिर दो ही घड़ीमें वह समतल मार्गसे भागने लगा
tato nimnaṃ sthalaṃ caiva sa mṛgo 'dravad āśugaḥ | muhūrtam iva rājendra samena sa pathāgamat ||
ତାପରେ ସେ ଶୀଘ୍ରଗାମୀ ମୃଗ ନିମ୍ନ ଭୂମି ଦିଗକୁ ଦୌଡ଼ିଲା। ହେ ରାଜେନ୍ଦ୍ର, ମୁହୂର୍ତ୍ତମାତ୍ରେ ସେ ସମତଳ ପଥକୁ ଆସି ସେଠାରୁ ଦୌଡ଼ିଲା।
भीष्म उवाच