Jaitrya-nimitta: Signs of Prospective Victory and the Priority of Conciliation (जयलक्षण-निमित्त तथा सान्त्व-प्रधान नीति)
विश्वासं चात्र गच्छन्ति सर्वभूतानि भारत । विश्वस्त: शक््यते भोक्तुं यथाकाममुपस्थित:,भरतनन्दन! उसके ऊपर सब प्राणी विश्वास करने लगते हैं। विश्वासपात्र हो जानेपर वह सबके निकट रहकर इच्छानुसार सारे राष्ट्रका उपभोग कर सकता है
ହେ ଭରତନନ୍ଦନ! ତେବେ ସମସ୍ତ ପ୍ରାଣୀ ତାଙ୍କ ଉପରେ ବିଶ୍ୱାସ କରନ୍ତି। ବିଶ୍ୱାସପାତ୍ର ହେଲେ ସେ ସମସ୍ତଙ୍କ ନିକଟରେ ରହି ଇଚ୍ଛାନୁସାରେ ରାଜ୍ୟଭୋଗ କରିପାରେ।
भीष्म उवाच