Duryodhana-vadha-pratikriyā: Harṣa, Nindā, and Kṛṣṇa’s Nīti-vyākhyā (Śalya-parva 60)
निकृत्या निकृता नित्यं धृतराष्ट्रसुतैर्वयम् बहूनि परुषाण्युक्त्वा वन॑ प्रस्थापिता: सम ह,परंतु क्या करूँ, धृतराष्ट्रके पुत्रोंने सदा ही हमें अपने कपटजालका शिकार बनाया और बहुत-से कटुवचन सुनाकर वनमें भेज दिया
nikṛtyā nikṛtā nityaṃ dhṛtarāṣṭrasutair vayam | bahūni paruṣāṇy uktvā vanaṃ prasthāpitāḥ sma ha ||
ଧୃତରାଷ୍ଟ୍ରଙ୍କ ପୁତ୍ରମାନେ କପଟରେ ଆମକୁ ସଦା ଠକାଇଛନ୍ତି। ଅନେକ କଠୋର ବଚନ କହି ଆମକୁ ବନକୁ ପଠାଇଥିଲେ।
युधिछिर उवाच