शल्यपर्व — चतुर्विंशोऽध्यायः | Śalya Parva, Chapter 24: Disruption of Kaurava Formations and the Elephant Encirclement
शरचापधर: पार्थ: प्रज्वलन्निव भास्कर: । ददाह समरे योधान् कक्षमग्निरिव ज्वलन्,जैसे जलती हुई आग घास-फ़ूसके ढेरको जला देती है, उसी प्रकार सूर्यके समान प्रकाशित होनेवाले धनुष-बाणधारी अर्जुनने समरांगणमें आपके योद्धाओंको दग्ध कर दिया
śaracāpadharaḥ pārthaḥ prajvalann iva bhāskaraḥ | dadāha samare yodhān kakṣam agnir iva jvalan ||
ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ—ଶରଚାପଧାରୀ ପାର୍ଥ ସୂର୍ଯ୍ୟ ପରି ପ୍ରଜ୍ୱଲିତ ହୋଇ, ସମରରେ ଆପଣଙ୍କ ଯୋଧାମାନଙ୍କୁ ଦହିଦେଲେ; ଯେପରି ଜ୍ୱଳନ୍ତ ଅଗ୍ନି ଶୁଷ୍କ ଝାଡ଼ଜଙ୍ଗଲକୁ ଭସ୍ମ କରେ।
संजय उवाच