शल्यपरिघातः (Śalya Under Encirclement) — Mahābhārata, Śalya-parva, Adhyāya 12
पोथयन्तौ तदान्योन्यं मण्डलानि विचेरतु: । क्रियाविशेषं कृतिनौ दर्शयामासतुस्तदा,वे दोनों युद्धकलाके विद्वान् वीर, एक-दूसरेको कुचलते हुए मण्डलाकार विचरते और अपना-अपना विशेष कार्य-कौशल प्रदर्शित करते थे
pothayantau tadānyonyaṃ maṇḍalāni viceratuḥ | kriyāviśeṣaṃ kṛtinau darśayāmāsatuḥ tadā ||
ସେତେବେଳେ ଯୁଦ୍ଧକଳାରେ ପାରଙ୍ଗତ ସେ ଦୁଇ ବୀର ପରସ୍ପରକୁ ଦବାଇ ମଣ୍ଡଳାକାରେ ଘୁରୁଥିଲେ ଏବଂ ନିଜ-ନିଜ ବିଶେଷ କୌଶଳ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରୁଥିଲେ।
संजय उवाच