Adhyāya 6: Śibira-dvāra-sthita Bhūta-varṇana and Aśvatthāmā’s Śaraṇāgati to Mahādeva
अपश्यत् कृतमाकाशमनाकाशं जनार्दनै: । इस प्रकार जब उसके सारे अस्त्र-शस्त्र समाप्त हो गये, तब वह इधर-उधर देखने लगा। उस समय उसे सारा आकाश असंख्य विष्णुओंसे भरा दिखायी दिया ।। व 5 99 द्रोणपुत्रो निरायुध:
apaśyat kṛtam ākāśam anākāśaṃ janārdanaiḥ |
ତେବେ ସେ ଦେଖିଲା—ଆକାଶ ଆଉ ଶୂନ୍ୟ ଆକାଶ ନୁହେଁ; ଜନାର୍ଦନ (ବିଷ୍ଣୁ)ଙ୍କ ଅସଂଖ୍ୟ ରୂପରେ ତାହା ପୂର୍ଣ୍ଣ ଥିଲା।
संजय उवाच