Daiva–Puruṣakāra Saṃvāda
Kṛpa’s Counsel on Destiny and Human Effort
शवक्नोति जीवितुं दक्षो नालस: सुखमेधते । दृश्यन्ते जीवलोकेडस्मिन् दक्षा: प्रायो हितैषिण:,पुरुषार्थमें लगा हुआ दक्ष पुरुष सुखसे जीवन-निर्वाह कर सकता है; परंतु आलसी मनुष्य कभी सुखी नहीं होता है। इस जीव-जगतमें प्राय: तत्परतापूर्वक कर्म करनेवाले ही अपना हित साधन करते देखे जाते हैं
śaknoti jīvituṁ dakṣo nālasaḥ sukham edhate | dṛśyante jīvaloke ’smin dakṣāḥ prāyo hitaiṣiṇaḥ ||
କୃପାଚାର୍ଯ୍ୟ କହିଲେ—ପୁରୁଷାର୍ଥରେ ଲଗ୍ନ ଦକ୍ଷ ପୁରୁଷ ସୁଖରେ ଜୀବନ ନିର୍ବାହ କରିପାରେ; କିନ୍ତୁ ଆଳସୀ ମନୁଷ୍ୟ କେବେ ସୁଖୀ ହୁଏ ନାହିଁ। ଏହି ଜୀବଲୋକରେ ପ୍ରାୟଃ ଦକ୍ଷ ହୋଇ ତତ୍ପରତାରେ କର୍ମ କରୁଥିବାମାନେ ହିଁ ନିଜ ହିତ ସାଧନ କରନ୍ତି ବୋଲି ଦେଖାଯାଏ।
कृप उवाच