Book 10, Adhyāya 12: Aśvatthāmā’s Request for the Cakra and the Brahmaśiras Context
“जब मैंने इस तरह पूछा, तब द्रोणकुमारने मुझे इस प्रकार उत्तर दिया--'श्रीकृष्ण! मैं आपकी पूजा करके फिर आपके ही साथ युद्ध करूँगा। प्रभो! मैं यह सच कहता हूँ कि मैंने इस देव-दानवपूजित चक्रको आपसे इसीलिये माँगा था कि इसे पाकर अजेय हो जाऊँ ।।
tvatto 'haṁ durlabhaṁ kāmam anavāpyaiva keśava | pratiyāsyāmi govinda śivenābhivadāsva mām ||
ମୁଁ ଏପରି ପଚାରିଲେ ଦ୍ରୋଣପୁତ୍ର କହିଲା—“ହେ କେଶବ! ଆପଣଙ୍କଠାରୁ ଏହି ଦୁର୍ଲଭ ବର ପାଇବା ବିନାହିଁ ମୁଁ ଫେରିଯିବି। ହେ ଗୋବିନ୍ଦ! ମୋତେ କେବଳ ଏତିକି କହିଦିଅନ୍ତୁ—‘ତୋର କଲ୍ୟାଣ ହେଉ’।”
वैशम्पायन उवाच