Śiśupāla-vākya: Bhīṣma-nindā and the ‘Haṃsa’ Exemplum (शिशुपालवाक्यम् — भीष्मनिन्दा, हंसदृष्टान्तः)
दान॑ दाक्ष्यं श्रुतं शौर्य ह्वी: कीर्तिबिद्धिरुत्तमा । सन्नति:ः श्रीर्ध॑तिस्तुष्टि: पुष्टिश्न नियताच्युते,दान, दक्षता; शास्त्रज्ञान, शौर्य, लज्जा, कीर्ति, उत्तम बुद्धि, विनय, श्री, धृति, तुष्टि और पुष्टि --ये सभी सदगुण भगवान् श्रीकृष्णमें नित्य विद्यमान हैं
ଦାନ, ଦକ୍ଷତା, ଶାସ୍ତ୍ରଶ୍ରବଣଜନିତ ଜ୍ଞାନ, ଶୌର୍ୟ, ହ୍ରୀ (ଲଜ୍ଜା), କୀର୍ତ୍ତି, ଉତ୍ତମ ବୁଦ୍ଧି, ବିନୟ, ଶ୍ରୀ, ଧୃତି, ତୁଷ୍ଟି ଓ ପୁଷ୍ଟି—ଏହି ସମସ୍ତ ସଦ୍ଗୁଣ ଅଚ୍ୟୁତ (ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣ)ଙ୍କଠାରେ ନିତ୍ୟ ବିଦ୍ୟମାନ।
भीष्म उवाच