Chapter 15: Counsel on Initiative vs. Renunciation in the Rajasuya Project (सभापर्व, अध्याय १५)
कृष्णे नयो मयि बल॑ जय: पार्थे धनंजये । मागध॑ं साधयिष्याम इष्टिं त्रय इवाग्नय:,श्रीकृष्णमें नीति है, मुझमें बल है और अर्जुनमें विजयकी शक्ति है। हम तीनों मिलकर मगधराज जरासंधके वधका कार्य पूरा कर लेंगे; ठीक उसी तरह, जैसे तीनों अग्नियाँ यज्ञकी सिद्धि कर देती हैं
ଭୀମ କହିଲେ—କୃଷ୍ଣଙ୍କଠାରେ ନୀତି ଅଛି, ମୋ ଠାରେ ବଳ ଅଛି, ଏବଂ ପାର୍ଥ ଧନଞ୍ଜୟ ଅର୍ଜୁନଙ୍କଠାରେ ଜୟଶକ୍ତି ଅଛି। ଆମେ ତିନିଜଣ ମିଶି ମାଗଧରାଜ ଜରାସନ୍ଧ-ବଧର କାର୍ଯ୍ୟ ସାଧିବୁ—ଯେପରି ତିନି ଅଗ୍ନି ଯଜ୍ଞକୁ ସିଦ୍ଧ କରେ।
भीम उवाच