तस्मिन् विमर्दे रथवाजिनागै- स्तदाभिघातैर्दलिते हि भूतले । ततस्तु पातालतले शयानो नागो<श्वसेन: कृतवैरोडर्जुनेन,राजन्! उस समय घमासान युद्धमें जब रथ, घोड़े और हाथियोंद्वारा सारा भूतल रौंदा जा रहा था, उस समय पातालनिवासी अश्वसेन नामक नाग, जिसने अर्जुनके साथ वैर बाँध रखा था और जो खाण्डवदाहके समय जीवित बचकर क्रोधपूर्वक इस पृथ्वीके भीतर घुस गया था; कर्ण तथा अर्जुनका वह संग्राम देखकर बड़े वेगसे ऊपरको उछला और उस युद्धस्थलमें आ पहुँचा; उसमें ऊपरको उड़नेकी भी शक्ति थी
sañjaya uvāca |
tasmin vimarde rathavājināgais tadābhighātair dalite hi bhūtale |
tatastu pātālatale śayāno nāgo 'śvasenaḥ kṛtavairo 'rjunena rājan |
ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ—ହେ ରାଜନ୍! ସେଇ ଘୋର ଘମାସାନରେ ଯେତେବେଳେ ରଥ, ଘୋଡ଼ା ଓ ହାତୀମାନଙ୍କ ଆଘାତରେ ଭୂତଳ ଦଳିତ ହେଉଥିଲା, ସେତେବେଳେ ପାତାଳତଳରେ ଶୟନ କରୁଥିବା ଅଶ୍ୱସେନ ନାମକ ନାଗ—ଯିଏ ଅର୍ଜୁନ ସହିତ ବୈର ବାନ୍ଧିଥିଲା—ସେଇ ଆଘାତରେ ଉଦ୍ବେଳିତ ହୋଇ ଉଠିଲା। କର୍ଣ୍ଣ ଓ ଅର୍ଜୁନଙ୍କ ସେଇ ସମରକୁ ଦେଖି ସେ ମହାବେଗରେ ଉପରକୁ ଉଠି ଯୁଦ୍ଧସ୍ଥଳକୁ ପହଞ୍ଚିଲା; କାରଣ ତାହାର ଉଡ଼ିବାର ଶକ୍ତି ମଧ୍ୟ ଥିଲା, ଏବଂ ପୁରୁଣା ବୈର ପ୍ରତିଶୋଧର ସୁଯୋଗ ଖୋଜୁଥିଲା।
संजय उवाच