अध्याय ९ — कर्णस्य प्रहारः, योधयुग्मनियोजनम्, शैनेय-कैकेययोर्युद्धविन्यासः
कच्चिन्नैक: परित्यक्त: पाण्डवैर्निहतो रणे । उक्त त्वया पुरा तात यथा वीरो निपातित:,तात! कहीं ऐसा तो नहीं हुआ कि कर्णको अकेला छोड़ दिया गया हो और समस्त पाण्डवोंने मिलकर उसे मार डाला हो; क्योंकि तुम पहले बता चुके हो कि वीर कर्ण मारा गया
kaccin naikaḥ parityaktaḥ pāṇḍavair nihato raṇe | uktaṃ tvayā purā tāta yathā vīro nipātitaḥ ||
ବୈଶମ୍ପାୟନ କହିଲେ—ତାତ! କର୍ଣ୍ଣଙ୍କୁ ଏକାକୀ ଛାଡ଼ିଦିଆଯାଇ, ପାଣ୍ଡବମାନେ ସମସ୍ତେ ମିଶି ରଣରେ ତାଙ୍କୁ ବଧ କଲେ କି? କାରଣ ତୁମେ ପୂର୍ବରୁ କହିଛ ଯେ ସେ ବୀର ପତିତ ହେଲେ।
वैशम्पायन उवाच