हताश्चमञ्जोगतिभशि: प्रसेन: शिनिप्रवीरं निशितै: पृषत्कैः | प्रच्छाद्य नृत्यन्निव कर्णपुत्र: शैनेयबाणाभिहत: पपात,उधर कर्णने जब सात्यकिके घोड़े मार डाले, तब कर्णपुत्र प्रसेनने तीव्रगामी पैने बाणोंद्वारा शिनिप्रवर सात्यकिको ढक दिया। इसके बाद सात्यकिके बाणोंकी चोट खाकर वह नाचता हुआ-सा पृथ्वीपर गिर पड़ा
hatāś ca mañjogatibhaśiḥ prasenaḥ śinipravīraṃ niśitaiḥ pṛṣatkaiḥ | pracchādya nṛtyann iva karṇaputraḥ śaineyabāṇābhihataḥ papāta |
ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ—ସାତ୍ୟକିଙ୍କ ଘୋଡ଼ା ହତ ହେବା ପରେ କର୍ଣ୍ଣପୁତ୍ର ପ୍ରସେନ ତୀକ୍ଷ୍ଣ, ବେଗବାନ ବାଣରେ ଶିନିବଂଶର ପ୍ରବୀର ସାତ୍ୟକିଙ୍କୁ ଆବୃତ କଲା। କିନ୍ତୁ ଶୈନେୟଙ୍କ ବାଣାଘାତରେ ପ୍ରତିହତ ହୋଇ ସେ ନୃତ୍ୟ କରୁଥିବା ପରି ପୃଥିବୀରେ ପଡ଼ିଗଲା।
संजय उवाच