निरस्तजिद्दानेत्रान्ता वाजिन: सह सादिभि: | पतिता: पात्यमानाश्ष क्षितौ क्षीणा विशेरते,'ये कौरवपक्षके सवारोंसहित घोड़े क्षत-विक्षत हो, अर्जुनके द्वारा गिराये जा रहे हैं। इनकी जीभें और आँखें बाहर निकल आयी हैं। ये गिरकर पृथ्वीपर सो रहे हैं
nirasta-jihvā-netrāntā vājiṇaḥ saha sādibhiḥ | patitāḥ pātyamānāś ca kṣitau kṣīṇā viśerate ||
କୌରବପକ୍ଷର ଘୋଡ଼ାମାନେ ସୱାରମାନଙ୍କ ସହିତ ଆଘାତ ପାଇ ଢଳିପଡ଼ୁଛନ୍ତି। ଜିଭା ଲଟକୁଛି, ଆଖିର କୋଣ ବାହାରିଆସିଛି। ଭୂମିରେ ପଡ଼ି, ଆଉ ମଧ୍ୟ ପତିତ କରାଯାଉଥିବାବେଳେ, କ୍ଷୀଣ ହୋଇ ସେମାନେ ପଡ଼ି ରହିଛନ୍ତି।
अजुन उवाच