एष शल्यो रथोपस्थे रश्मिसंचारकोविद: । सूतपुत्ररर्ं कृष्ण वाहयन् बहु शोभते,श्रीकृष्ण! घोड़ोंकी बागडोरका संचालन करनेकी कलामें कुशल ये राजा शल्य रथके निचले भागमें बैठकर सूतपुत्रका रथ हाँकते हुए बड़ी शोभा पाते हैं
eṣa śalyo rathopasthe raśmisañcārakovidaḥ | sūtaputrasya kṛṣṇa vāhayan bahu śobhate ||
ଅର୍ଜୁନ କହିଲେ—ହେ କୃଷ୍ଣ! ଦେଖ, ରଶ୍ମି (ବାଗଡୋର) ସଞ୍ଚାଳନରେ କୁଶଳ ରାଜା ଶଲ୍ୟ ରଥର ନିମ୍ନ ଭାଗରେ ବସିଛନ୍ତି। ସୂତପୁତ୍ର କର୍ଣ୍ଣଙ୍କ ରଥ ହାଙ୍କୁଥିବାବେଳେ ସେ ବହୁତ ଶୋଭା ପାଉଛନ୍ତି।
अजुन उवाच