कर्णनिधनवृत्तान्तनिवेदनम् | Reporting Karṇa’s Fall to Yudhiṣṭhira
भ्राता प्राज्ञस्तव कोपं न जातु कुर्याद् राजा धर्ममवेक्ष्य चापि । मुक्तोडनृताद् भ्रातृवधाच्च पार्थ हृष्ट: कर्ण त्वं जहि सूतपुत्रम्,कुन्तीनन्दन! तुम्हारे भाई राजा युधिष्ठिर समझदार हैं। ये धर्मका खयाल करके भी तुमपर कभी क्रोध नहीं करेंगे। इस प्रकार तुम मिथ्याभाषण और भ्रातृ-वधके पापसे मुक्त हो बड़े हर्षके साथ सूतपुत्र कर्णका वध करना
vāyudeva uvāca |
bhrātā prājñas tava kopaṃ na jātu kuryād rājā dharmam avekṣya cāpi |
mukto ’nṛtād bhrātṛ-vadhāc ca pārtha hṛṣṭaḥ karṇa tvaṃ jahi sūta-putram ||
ବାୟୁ କହିଲେ— ଧର୍ମକୁ ଦୃଷ୍ଟିରେ ରଖୁଥିବା ତୁମ ଭାଇ, ପ୍ରାଜ୍ଞ ରାଜା ଯୁଧିଷ୍ଠିର, କେବେ ମଧ୍ୟ ତୁମପ୍ରତି କ୍ରୋଧ କରିବେ ନାହିଁ। ତେଣୁ ହେ ପାର୍ଥ! ଅସତ୍ୟ ଓ ଭ୍ରାତୃବଧର ପାପରୁ ମୁକ୍ତ ହୋଇ, ହର୍ଷିତ ହୃଦୟରେ ସୂତପୁତ୍ର କର୍ଣ୍ଣକୁ ବଧ କର।
वायुदेव उवाच