अर्जुनकर्णयोर्युद्धवर्णनम्
Description of the Arjuna–Karṇa Engagement and Counsel to Duryodhana
त॑ दृष्टवा पुरुषव्याप्रं क्षेमिणं पुरुषर्षभम् मुदाभ्युपगतौ कृष्णावश्चिनाविव वासवम्,पुरुषसिंह पुरुषप्रवर श्रीकृष्ण एवं अर्जुनको सकुशल देखकर तथा दोनों कृष्णोंको इन्द्रके पास गये हुए अश्विनीकुमारोंके समान प्रसन्नतापूर्वक अपने समीप आया जान राजा युधिष्ठिरने उनका उसी तरह अभिनन्दन किया, जैसे सूर्य दोनों अश्विनीकुमारोंका स्वागत करते हैं। अथवा जैसे महान् असुर जम्भके मारे जानेपर बृहस्पतिने इन्द्र और विष्णुका अभिनन्दन किया था
taṁ dṛṣṭvā puruṣavyāghraṁ kṣemiṇaṁ puruṣarṣabham | mudābhyupagatau kṛṣṇāv aśvināv iva vāsavam ||
ସେଇ ପୁରୁଷବ୍ୟାଘ୍ରମାନଙ୍କୁ କ୍ଷେମରେ ଦେଖି ରାଜା ଯୁଧିଷ୍ଠିର ଆନନ୍ଦରେ ପ୍ରଫୁଲ୍ଲିତ ହେଲେ ଏବଂ ଆଗକୁ ଆସି ଦୁଇ କୃଷ୍ଣଙ୍କୁ (ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣ ଓ ଅର୍ଜୁନ) ସେହିପରି ସ୍ୱାଗତ କଲେ, ଯେପରି ଇନ୍ଦ୍ର ନିଜ ପାଖକୁ ଆସିଥିବା ଅଶ୍ୱିନୀକୁମାରଦ୍ୱୟଙ୍କୁ କରନ୍ତି।
संजय उवाच