अर्जुनस्य शीघ्रप्रयाणं भीम-शकुनियुद्धं च
Arjuna’s Rapid Advance and the Bhīma–Śakuni Encounter
नरेश्वरर जिस समय ज्वार न उठनेसे जल स्वच्छ एवं शान्त हो, उस समय जैसे समुद्र निश्चल दिखायी देता है, उसी प्रकार आपकी सारी सेना निश्चेष्ट खड़ी थी ।। मन्युवीर्यबलोपेतं दर्पात् प्रत्यवरोपितम् । अभवत् तव पुत्रस्य तत् सैन्यं निष्प्रभं तदा,यद्यपि आपके सैनिकोंमें क्रोध, पराक्रम और बलकी कमी नहीं थी तो भी उनका घमंड चूर-चूर हो गया था; इसलिये उस समय आपके पुत्रकी वह सारी सेना तेजोहीन-सी प्रतीत होती थी
sañjaya uvāca |
manyu-vīrya-balopetaṃ darpāt pratyavaropitam |
abhavat tava putrasya tat sainyaṃ niṣprabhaṃ tadā ||
ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ—ହେ ନରେଶ୍ୱର! ଯେତେବେଳେ ଜ୍ୱାର ନ ଉଠିବାରୁ ଜଳ ସ୍ୱଚ୍ଛ ଓ ଶାନ୍ତ ଥାଏ, ସେତେବେଳେ ସମୁଦ୍ର ଯେପରି ନିଶ୍ଚଲ ଦେଖାଯାଏ, ସେପରି ଆପଣଙ୍କ ସମଗ୍ର ସେନା ନିଶ୍ଚେଷ୍ଟ ହୋଇ ଦାଁଡ଼ିଥିଲା। ଯଦିଓ ଆପଣଙ୍କ ସୈନିକମାନଙ୍କର କ୍ରୋଧ, ପରାକ୍ରମ ଓ ବଳର ଅଭାବ ନଥିଲା, ତଥାପି ତାଙ୍କର ଦର୍ପ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାଙ୍ଗି ପଡ଼ିଥିଲା; ତେଣୁ ସେ ସମୟରେ ଆପଣଙ୍କ ପୁତ୍ରଙ୍କ ସେଇ ସେନା ତେଜହୀନ ଦେଖାଯାଉଥିଲା।
संजय उवाच