Kṛpa’s Archery Display; Śikhaṇḍin Checked; Suketu Slain; Dhṛṣṭadyumna–Kṛtavarmā Clash (कृपशौर्य–पार्षतहार्दिक्ययुद्धम्)
यच्च प्रार्थयसे हन्तुं कृष्णौ मोहाद् वृथैव तत् । न हि शुश्रुम सम्मर्दे क्रोष्टा सिंहौ निपातितो,और जो तुम मोहवश श्रीकृष्ण तथा अर्जुनको मारना चाहते हो, वह मनसूबा तो व्यर्थ ही है; क्योंकि हमने यह बात कभी नहीं सुनी है कि किसी गीदड़ने युद्धमें दो सिंहोंको मार गिराया हो
ଆଉ ମୋହବଶେ ତୁମେ ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣ ଓ ଅର୍ଜୁନଙ୍କୁ ହତ୍ୟା କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛ—ସେ ଯୋଜନା ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ବ୍ୟର୍ଥ; କାରଣ ଯୁଦ୍ଧରେ କୌଣସି ଗିଦଡ଼ ଦୁଇଟି ସିଂହକୁ ନିପାତ କରିଛି ବୋଲି ଆମେ କେବେ ଶୁଣିନାହିଁ।
शल्य उवाच