Adhyāya 10: Śrutakarmā’s Engagements; Prativindhya–Citra Duel; Drauṇi Advances toward Bhīma
कर्णमेवाभिषेक्ष्याम: सैनापत्येन भारत । कर्ण सेनापतिं कृत्वा प्रमथिष्यामहे रिपून्,“यदि सारे कार्य उत्तम नीतिके अनुसार किये जायाँ तो उनके द्वारा दैवको भी अनुकूल किया जा सकता है; अतः भारत! हमलोग सर्वगुणसम्पन्न नरश्रेष्ठ कर्णका ही सेनापतिके पदपर अभिषेक करेंगे और इन्हें सेनापति बनाकर हमलोग शत्रुओंकोी मथ डालेंगे
karṇam evābhiṣekṣyāmaḥ saināpatyena bhārata | karṇaṃ senāpatiṃ kṛtvā pramathiṣyāmahe ripūn ||
ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ—ହେ ଭାରତ! ଆମେ କେବଳ କର୍ଣ୍ଣଙ୍କୁ ହିଁ ସେନାପତି ପଦରେ ଅଭିଷେକ କରିବୁ। କର୍ଣ୍ଣଙ୍କୁ ସେନାପତି କରି ଶତ୍ରୁମାନଙ୍କୁ ମଥିଦେବୁ।
संजय उवाच