दुःशासननिग्रहः—द्रोणधृष्टद्युम्नयुद्धप्रसङ्गः
Rebuke of Duḥśāsana; Context of the Droṇa–Dhṛṣṭadyumna Combat
तेषां युद्धं समभवद् दारुणं शोणितोदकम् । सिंहस्य द्विपमुख्याभ्यां प्रभिन्नाभ्यां यथा वने,जैसे वनमें सिंहका दो मदस्रावी महान् हाथियोंके साथ युद्ध हो रहा हो, उसी प्रकार विराट और विन्द-अनुविन्दमें बड़ा भयंकर संग्राम होने लगा, जहाँ पानीकी तरह खून बहाया जा रहा था
ସେମାନଙ୍କର ଯୁଦ୍ଧ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଦାରୁଣ ହେଲା; ରକ୍ତ ଯେନେ ପାଣି ପରି ବହିଲା। ଯେପରି ବନରେ ସିଂହ ଦୁଇ ମଦମତ୍ତ ମହାହାତୀ ସହ ଯୁଦ୍ଧ କରେ, ସେପରି ବିରାଟ ଓ ବିନ୍ଦ-ଅନୁବିନ୍ଦ ମଧ୍ୟରେ ଭୟଙ୍କର ସଙ୍ଗ୍ରାମ ଆରମ୍ଭ ହେଲା।
संजय उवाच