द्रोणपर्व — अध्याय ८७: सात्यकेरनुयात्रा
Sātyaki’s resolve and departure to reach Arjuna
प्रत्याचष्ट स दाशार्हमृषभं सर्वधन्विनाम् । अनुनेयानि जल्पन्तमनयान्नान्वपद्यत,परंतु उसने सम्पूर्ण धनुर्धरोंमें श्रेष्ठ भगवान् श्रीकृष्णकी बात माननेसे इनकार कर दिया। यद्यपि वे अनुनयपूर्ण वचन बोलते थे, तथापि दुर्योधनने अन्यायवश उन्हें नहीं माना
କିନ୍ତୁ ସେ ସମସ୍ତ ଧନୁର୍ଧରମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଦାଶାର୍ହ (ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣ)ଙ୍କୁ ପ୍ରତ୍ୟୁତ୍ତର ଦେଇ ପ୍ରତ୍ୟାଖ୍ୟାନ କଲା; ସେ ଅନୁନୟପୂର୍ଣ୍ଣ ବଚନ କହୁଥିଲେ ମଧ୍ୟ, ଅନ୍ୟାୟବଶତଃ ଦୁର୍ଯ୍ୟୋଧନ ତାଙ୍କ କଥା ମାନିଲା ନାହିଁ।
धृतराष्ट उवाच