द्रोणवध-प्रश्नः
Droṇa’s Fall: Dhṛtarāṣṭra’s Inquiry
पितरं तु परिप्रेप्सु: क्षत्रधर्मा यतव्रत: । सिद्धि चास्य परां काड्क्षन् शोणाश्व: संन्यवर्तत,नियमपूर्वक व्रतका पालन करनेवाला क्षत्रधर्मा अपने पिता धृष्टद्युम्नकी रक्षा और उनके अभीष्ट मनोरथकी उत्तम सिद्धि चाहता हुआ लाल रंगके घोड़ोंसे युक्त रथपर आरूढ़ हो लौट आया
ପିତାଙ୍କୁ ରକ୍ଷା କରିବାକୁ ଆକାଙ୍କ୍ଷୀ, କ୍ଷତ୍ରଧର୍ମନିଷ୍ଠ ଓ ନିୟମବ୍ରତପାଳକ ଶୋଣାଶ୍ୱ, ତାଙ୍କ ଅଭୀଷ୍ଟର ପରମ ସିଦ୍ଧି କାମନା କରି, ଲାଲ ଅଶ୍ୱଯୁକ୍ତ ରଥରେ ଆରୂଢ଼ ହୋଇ ପୁନଃ ଫେରିଲେ।
संजय उवाच