अद्य दास्यामि संग्रामं सूतपुत्राय तं निशि । यं जना: सम्प्रवक्ष्यन्ति यावद् भूमिर्धरिष्यति,आज मैं इस रातमें सूतपुत्र कर्णके साथ ऐसा संग्राम करूँगा, जिसकी चर्चा जबतक यह पृथ्वी रहेगी, तबतक लोग करते रहेंगे
adya dāsyāmi saṅgrāmaṃ sūtaputrāya taṃ niśi | yaṃ janāḥ sampravakṣyanti yāvad bhūmir dhariṣyati ||
ଆଜି ଏହି ରାତିରେ ମୁଁ ସୂତପୁତ୍ର କର୍ଣ୍ଣଙ୍କ ସହ ଏମିତି ଏକ ସଙ୍ଗ୍ରାମ କରିବି, ଯାହାର କଥା ଏହି ପୃଥିବୀ ଯେତେଦିନ ଧରି ରହିବ ସେତେଦିନ ଲୋକେ କହିବେ।
घटोत्कच उवाच