द्रोणपुत्रस्याग्नेयास्त्रप्रयोगः — अर्जुनस्य ब्राह्मास्त्रप्रतिघातः — व्यासोपदेशः
Aśvatthāmā’s Agneyāstra, Arjuna’s Brāhmāstra Counter, and Vyāsa’s Instruction
कर्णस्य मतमास्थाय पुत्रस्ते प्राह सौबलम् | यथेन्द्र: समरे राजनू् _प्राह विष्णुं यशस्विनम्,राजन! जैसे इन्द्र समरांगणमें परम यशस्वी भगवान् विष्णुसे कोई बात कहते हैं, उसी प्रकार आपके पुत्र दुर्योधनने कर्णकी सलाह मानकर सुबलपुत्र शकुनिसे इस प्रकार कहा --
karṇasya matam āsthāya putras te prāha saubalam | yathendraḥ samare rājan prāha viṣṇuṁ yaśasvinam ||
ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ—କର୍ଣ୍ଣଙ୍କ ମତ ଗ୍ରହଣ କରି ତୁମ ପୁତ୍ର ଦୁର୍ଯ୍ୟୋଧନ ସୌବଳ (ଶକୁନି)ଙ୍କୁ ଏପରି କହିଲା। ହେ ରାଜନ! ଯେପରି ରଣଭୂମିରେ ଇନ୍ଦ୍ର ଯଶସ୍ବୀ ବିଷ୍ଣୁଙ୍କୁ କହନ୍ତି, ସେପରି ଦୁର୍ଯ୍ୟୋଧନ କହିଲା।
संजय उवाच