Śalya–Bhīma Gadāyuddham (मद्रराज-भीमसेन गदायुद्धम्)
अथैनं सहसा सर्वे समन्तान्निशितै: शरै: । अभ्याकिरन् महाराज जलदा इव पर्वतम्,महाराज! उस समय आपके पुत्र शत्रुकी विजयकी सूचना देनेवाले उस सिंहनादको नहीं सह सके। वे सब-के-सब सहसा सब ओरसे अभिमन्युपर पैने बाणोंकी वर्षा करने लगे, मानो मेघ पर्वतपर जलकी धाराएँ बरसा रहे हों
ତାପରେ, ମହାରାଜ, ସେମାନେ ସମସ୍ତେ ହଠାତ୍ ସବୁ ଦିଗରୁ ତୀକ୍ଷ୍ଣ ବାଣରେ ତାଙ୍କୁ ଆବୃତ କରିଦେଲେ—ଯେପରି ମେଘ ପର୍ବତ ଉପରେ ଜଳଧାରା ବର୍ଷାଏ।
संजय उवाच