Irāvān-nidhana-anantaraṃ Ghaṭotkaca-nādaḥ
After Irāvān’s fall: Ghaṭotkaca’s roar and the clash with Duryodhana
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १६ “लोक मिलाकर कुल ५८ $ “लोक हैं।] #-ि>ोी >> श््जु हम की चतुरशीतितमो< ध्याय: युधिष्ठिरसे राजा क मूच्छित होना, होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ संजय उवाच ततो युधिष्ठिरो राजा मध्यं प्राप्ते दिवाकरे । श्रुतायुषमभिप्रेक्ष्य प्रेषयामास वाजिन:,संजय कहते हैं--महाराज! जब सूर्यदेव दिनके मध्यभागमें आ गये, तब राजा युधिष्ठिरने श्रुतायुको देखकर उसकी ओर अपने घोड़ोंको बढ़ाया
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ସଞ୍ଜୟ କହିଲେ—ମହାରାଜ! ସୂର୍ଯ୍ୟ ଦିନର ମଧ୍ୟଭାଗକୁ ପ୍ରାପ୍ତ ହେବାବେଳେ, ରାଜା ଯୁଧିଷ୍ଠିର ଶ୍ରୁତାୟୁଙ୍କୁ ଦେଖି ତାଙ୍କ ଦିଗକୁ ନିଜ ଅଶ୍ୱସେନାକୁ ଅଗ୍ରସର କଲେ।
संजय उवाच