Arjuna’s Advance toward Bhīṣma; The Gāṇḍīva’s Signal and the Armies’ Convergence (भीष्माभिमुखगमनम् — गाण्डीवनिर्घोष-ध्वजवर्णनम्)
स पीड्यमानस्तैनगिर्वेदनार्त: शराहतः । अनदत् सुमहानादमिन्द्राशनिसमस्वनम्,वे सब-के-सब भगदत्तके हाथीको अपने दाँतोंसे पीड़ा देने लगे। वह बाणोंसे बहुत घायल हो चुका था; अतः इन हाथियोंद्वारा पीड़ित होनेपर वेदनासे व्याकुल हो बड़े जोर- जोरसे चीत्कार करने लगा। उसकी आवाज इन्द्रके वज्रकी गड़गड़ाहटके समान जान पड़ती थी
sa pīḍyamānas tainagir vedanārtaḥ śarāhataḥ | anadat sumahānādam indrāśani-samasvanam ||
ସେହି ହାତୀମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପୀଡିତ ଏବଂ ଶରାହତ ହୋଇ, ବେଦନାରେ ଆର୍ତ୍ତ ହୋଇ ସେ ଅତି ମହାନାଦ କଲା—ଇନ୍ଦ୍ରର ବଜ୍ରଗର୍ଜନ ସଦୃଶ।
संजय उवाच