Adhyāya 65: Dawn Assembly, Makara–Śyena Vyūhas, and Commander Engagements
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका ह श्लोक मिलाकर कुल ३६६ “लोक हैं।] जी श््न बाग द्विषष्टितमो5 ध्याय: धृष्टद्युम्न और शल्य आदि दोनों पक्षके वीरोंका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार धृतराष्ट उवाच दैवमेव परं मन्ये पौरुषादपि संजय । यत् सैन्यं मम पुत्रस्य पाण्डुसैन्येन बाध्यते,धृतराष्ट्र बोले--संजय! मैं पुरुषार्थकी अपेक्षा भी दैवको ही प्रधान मानता हूँ, जिससे मेरे पुत्र दुर्योधनकी सेना पाण्डवोंकी सेनासे पीड़ित हो रही है इस प्रकार श्रीमह्ाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें चौथे दिन भीमसेनका युद्धविषयक बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ६२ ॥ ऑपनआक्रात बा अं त्रेषष्टितमो<्ध्याय: युद्धस्थलमें प्रचण्ड पराक्रमकारी भीमसेनका भीष्मके साथ युद्ध तथा सात्यकि और भूरिश्रवाकी मुठभेड़ संजय उवाच हते तस्मिन् गजानीके पुत्रो दुर्योधनस्तव । भीमसेन घ्नतेत्येवं सर्वसैन्यान्यचोदयत्
dhṛtarāṣṭra uvāca | daivam eva paraṁ manye pauruṣād api sañjaya | yat sainyaṁ mama putrasya pāṇḍusainyena bādhyate ||
ଧୃତରାଷ୍ଟ୍ର କହିଲେ—ସଞ୍ଜୟ, ପୁରୁଷକାରଠାରୁ ମଧ୍ୟ ଦୈବକୁ ମୁଁ ପରମ ମନେ କରେ; କାରଣ ମୋ ପୁତ୍ରର ସେନା ପାଣ୍ଡବସେନା ଦ୍ୱାରା ଭାରି ଭାବେ ଦବାଯାଉଛି।
धृतराष्ट उवाच