उत्पातवर्णनम् (Utpāta-varṇanam) — Catalogue of Portents
ऑपनआक्रात बछ। अर तृतीयो<थध्याय: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन व्यास उवाच खरा गोषु प्रजायन्ते रमन्ते मातृभि: सुता: । अनार्तवं पुष्पफलं दर्शयन्ति वनद्रुमा:,व्यासजीने कहा--राजन! गायोंके गर्भसे गदहे पैदा होते हैं, पुत्र माताओंके साथ रमण करते हैं। वनके वृक्ष बिना ऋतुके फूल और फल प्रकट करते हैं
vyāsa uvāca | kharā goṣu prajāyante ramante mātṛbhiḥ sutāḥ | anārtavaṃ puṣpaphalaṃ darśayanti vanadrumāḥ |
ବ୍ୟାସ କହିଲେ—ହେ ରାଜନ୍! ଗାଈମାନଙ୍କ ଗର୍ଭରୁ ଗଧା ଜନ୍ମୁଛି; ପୁଅମାନେ ନିଜ ମାଆଙ୍କ ସହିତ ରମଣ କରୁଛନ୍ତି। ବନର ଗଛମାନେ ଋତୁବିପର୍ୟୟରେ ଫୁଲ ଓ ଫଳ ଦେଖାଉଛନ୍ତି। ଏହା ଅମଙ୍ଗଳ ନିମିତ୍ତ—ମହାଯୁଦ୍ଧ ସନ୍ନିକଟେ ପ୍ରକୃତି ଓ ଧର୍ମାଚାରର ବିପର୍ୟୟ ସୂଚାଏ।
व्यास उवाच