दुःशासनो विकर्णश्व रथानास्थाय भास्वरान् । पाण्डवानां रणे शूरा ध्वजिनीं समकम्पयन्,उस महाभयंकर युद्धमें किसीकी कोई विशेष पहचान नहीं रह गयी थी। भारत! तदनन्तर शल्य, कृपाचार्य, चित्रसेन, दशासन और विकर्ण--ये कौरववीर चमचमाते हुए रथोंपर बैठकर पाण्डवोंपर चढ़ आये और रणक्षेत्रमें उनकी सेनाको कँपाने लगे
sañjaya uvāca | duḥśāsano vikarṇaś ca rathān āsthāya bhāsvarān | pāṇḍavānāṃ raṇe śūrā dhvajinīṃ samakampayan |
ଦୁଃଶାସନ ଓ ବିକର୍ଣ୍ଣ—ରଣଶୂର—ଦୀପ୍ତିମାନ ରଥରେ ଆରୋହଣ କରି ପାଣ୍ଡବମାନଙ୍କ ଉପରେ ଝପଟି ପଡ଼ିଲେ ଏବଂ ରଣଭୂମିରେ ତାଙ୍କ ସେନାକୁ କମ୍ପାଇଦେଲେ।
संजय उवाच